शिल्पा शेट्टी ने चेहरे और सिर पर चुभोई सुइयां, क्या योग की इस मशहूर एक्ट्रेस को कुछ नया अपनाने की जरूरत थी?
बॉलीवुड की फिटनेस आइकॉन शिल्पा शेट्टी अपने अनुशासित योग अभ्यास और स्वस्थ जीवनशैली के लिए जानी जाती हैं। लेकिन हाल ही में शिल्पा ने एक ऐसी चिकित्सा पद्धति को अपनाया है, जो न केवल उनके फैंस बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भी चर्चा का विषय बन गई है। शिल्पा शेट्टी ने अपने चेहरे और सिर पर दर्जनों सुइयां चुभोने की प्रक्रिया अपनाई, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है।
क्या है एसीयुप्रेशर थैरेपी?
शिल्पा शेट्टी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह एसीयुप्रेशर थैरेपी के तहत अपने चेहरे और सिर पर सुइयां चुभोते हुए दिखाई दे रही हैं। यह एक पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है, जिसमें शरीर के विशिष्ट बिंदुओं पर पतली सुइयों को चुभोकर ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित किया जाता है। इस प्रक्रिया से शरीर के दर्द, मानसिक तनाव और अन्य शारीरिक समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है।
योग और एसीयुप्रेशर का संबंध
शिल्पा शेट्टी का मानना है कि योग और एसीयुप्रेशर दोनों एक-दूसरे को पूरक हैं। शिल्पा, जो खुद योग की प्रैक्टिशनर हैं, ने बताया कि एसीयुप्रेशर थैरेपी उनके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित हुई है। योग जहां शरीर को लचीलापन और ताकत प्रदान करता है, वहीं एसीयुप्रेशर शरीर की आंतरिक ऊर्जा को संतुलित करता है। शिल्पा का कहना है कि इस थैरेपी से उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों ही रूपों में सुधार महसूस हुआ है।
शिल्पा का स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति दृष्टिकोण
शिल्पा शेट्टी ने यह भी कहा कि फिटनेस सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक भी है। उनका मानना है कि एक स्वस्थ जीवनशैली के लिए शरीर और मन दोनों का सही संतुलन बनाए रखना जरूरी है। शिल्पा ने एसीयुप्रेशर को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि यह न केवल शरीर के दर्द को कम करता है, बल्कि शरीर में ऊर्जा का प्रवाह भी बेहतर करता है।
नए उपचारों को अपनाने की प्रवृत्ति
शिल्पा शेट्टी का यह कदम यह साबित करता है कि आजकल के स्वास्थ्य-conscious लोग पारंपरिक और आधुनिक उपचार विधियों का संयोजन कर अपने शरीर का अधिकतम ख्याल रख रहे हैं। शिल्पा ने यह संदेश दिया है कि फिटनेस केवल जिम या योग तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न उपचार विधियों को अपनाकर हम अपनी सेहत को और बेहतर बना सकते हैं।
निष्कर्ष:
शिल्पा शेट्टी ने एसीयुप्रेशर थैरेपी को अपनाकर यह सिद्ध कर दिया कि पारंपरिक उपचार और आधुनिक फिटनेस पद्धतियाँ एक साथ काम कर सकती हैं। उनकी यह पहल न केवल उनके फैंस को प्रेरित करती है, बल्कि स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति एक नया दृष्टिकोण भी प्रस्तुत करती है। शिल्पा ने हमें यह सिखाया कि किसी भी उपचार या विधि को अपनाने से पहले हमें अपनी शारीरिक और मानसिक जरूरतों को समझना चाहिए।
